हाईवे वार्डन बने संकट मोचक
Reporter: Ajay Parmar
14 Oct, 2016
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जयपुर: जयपुर दिल्ली हाईवे पर आये दिन सड़क दुर्घटनाएं होती रहती है। इन दुर्घटनाओं में अनेक लोग बुरी तरह जख्मी हो जाते हैं कुछ लोग तो मौके पर ही दम तोड़ देते हैं, लेकिन जो लोग सड़क दुर्घटनाओं में घायल होते हैं वे तत्काल पर्याप्त मदद के अभाव में दर्द के मारे कराहते रहते हैं व तड़फते रहते हैं। ।

इन हालात में घायलों को तत्काल मदद कैसे पहुंचे, इसका उपाय खोजा जयपुर ग्रामीण जिला पुलिस की कोटपूतली वृत्त की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल शेखावत ने। उन्होंने अपने वरिष्ठ एवं सहायक अधिकारियों को बताया कि अगर हाईवे पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकने हेतु हाईवे पर होटल एवं दुकानें चलाने वाले तथा आस-पास के लोगों को ’’हाईवे वार्डन’’(पुलिस मित्र) के रूप में जोड़ कर व उन्हें प्रशिक्षण दिलाया जाये तो न केवल दुर्घटनाओं में घायल होने वाले व्यक्तियों के जीवन की रक्षा हो सकेगी बल्कि अनेक संदिग्ध गतिविधियों पर नजर भी रखी जा सकेगी।

उनके इस नवाचार को रेंज के वरिष्ठ अधिकारियों ने सराहा व उन्हें इस रचनात्मक पहल को अमलीजामा पहनाने का जिम्मा सौंप दिया ।

उन्होंने अपनी टीम व सीएलजी सदस्यों के सहयोग से समाज-सेवा हेतु सदैव तत्पर रहने वाले लगभग 53 ’’हाईवे वार्डन’’ को विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से प्राथमिक उपचार का आवश्यक प्रशिक्षण दिलाया व उन्हें ’’पुलिस मित्र’’ का कार्य सौंपा। जयपुर दिल्ली हाईवे पर दुर्घटनाओं में घायलों को बचाने एवं अन्य संदिग्ध गतिविधियों पर लगाम लगाने हेतु शुरू की गई यह ’’हाईवे वार्डन’’(पुलिस मित्र) स्कीम अब आम जन के लिये जहां जीवनदायिनी साबित हो रही हैं, वहीं इन ’’हाईवे वार्डन्स’’(पुलिस मित्रों) से पुलिस को क्षेत्र की अनेक संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने में भी मदद मिल रही है।

विगत 5 माह पूर्व शुरू किये गये इस नवाचार के रचनात्मक व सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं । गत दिनों हरियाणा रोडवेज की बस से एक्सीडेन्ट के दौरान हाईवे वार्डन (पुलिस मित्र) मदन मोहन ने मौके पर पहुंच कर 10-12 घायल व्यक्तियों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की तथा हाईवे जाम को खुलवाने में पुुलिस की सहायता की

। इसके कुछ दिन बाद कोटपुतली कट पर एक स्कॉर्पियो गाडी दुर्घटनाग्रस्त होने पर हाईवे वार्डन(पुलिस मित्र) कैलाश यादव ने मौके पर पहुंच कर घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की तथा हाईवे जाम को खुलवाने में पुलिस की सहायता की। एन.एच. 8 पर दुर्घटना घटित होने पर हाईवे पर मौजूद हाईवे वार्डन्स की प्रतिक्रिया अधिकांशतः सकारात्मक रहती है।

वे सदैव पुलिस के साथ खडे होकर घायलों को अस्पताल पहुंचाने और जाम को खुलवाने में पुलिस की सहायता हेतु तत्पर रहते हैैं। इसके अतिरिक्त ऎसा भी देखने में आया है कि हाईवे वार्डन्स ने सडक दुर्घटना होने पर जनता द्वारा अनेक बार सडक मार्ग को अवरूद्ध करने जैसी घटनाओं को भी रूकवाने में मदद की है। हाल ही में हाईवे वार्डन (पुलिस मित्र) मनोज राव ने अथक प्रयास कर 35 कि.मी. तक स्वयं की गाडी से समाजकंटकों का पीछा किया तथा पुलिस को सूचना देकर पीपली तिराहा शाहपुरा पर उन्हें पकडवाया।
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