वर्ल्ड हैड नेक कैंसर डे - 27 जुलाई युवाओं में बढ़ता हैड नेक कैंसर का खतरा: गुटका और पान मसालों पर प्रतिबंध कितना प्रभावी
Reporter: Ajay Parmar
26 Jul, 2016
417
देशभर में प्रतिवर्ष दस लाख से अधिक मुख और गले के कैंसर रोगी सामने आ रहे है,और जिनमें से 50 प्रतिशतकी मौत बीमारी की पहचान के अंतराल में ही हो जाती है।इसमें युवा अवस्था में होने वाली मौतों का कारण भी मुंह व गले का कैंसरमुख्य है।हालांकि पूरी दुनिया भर में विश्व गला व सिर कैंसर दिवस आज ही के दिन मनाया जा रहा है लेकिन अभी तक इससे होेनेवाली  मौतों पर सरकार पूरी तरह से रेाक लगाने में असफल सी साबित हो रही है। 

पिछले 16 सालों में मुख और गले के कैंसर रोगियेां कीसंख्या पुरुषों और महिलाओं में तीव्र गति से बढ़ती जा रही है। इसका खुलासा एशियन  पेसिफिक जर्नल ऑफ कैंसर प्रिवेंशन में जारीरिपोर्ट में हुआ है।

वायसॅ ऑफ टोबेको विक्टिमस व फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के निदेशक डा. वेदान्त काबराकहते हैं कि देशभर में लाखों लोगों  में देरी से इस बीमारी की पहचान, अपर्याप्त इलाज व अनुपयुक्त  पुनर्वास सहित सुविधाअेां का अभाव है।करीब 30 साल पहले  तक 60 से 70 साल की उम्र में मुंह और गले का कैंसर का कैंसर होता था लेकिन अब यहउम्र कम होकर 30 से 50 साल तक पहुंच गई। वही आजकल 20 से 25 वर्ष के कम उम्र के युवाओं में मुंह व गले का कैंसर देखा जा रहा है।इसका सबसेबड़ा कारण हमारी सभ्यता का पाश्चात्यकरण तथा युवाअेां में स्मोकिंग को फैशन व स्टाइल आइकान मानना है। मुंह के  कैंसर  के रोगियों की  सर्वाधिक संख्या भारत में है।

भारत में पूरे विश्व की तुलाना में धूम्ररहित चबाने वाले तंबाकू उत्पाद (जर्दा,गुटखा,खैनी,) का सेवन सबसे अधिक होता है। यह  सस्ताऔर आसानी से मिलने वाला नशा है। पिछले दो दशकेां में इसका  प्रयोग अत्यधिक रुप से बढ़ा है,  जिस कारण भी हैड  नेक  कैंसर के रोगीबढ़े है। डा. काबरा बतातें है कि 'इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिर्सच द्वारा वर्ष  2008 में प्रकाशित अनुमान  के मुताबिक  भारत  में हैड नेककैंसर के मामलों में वृद्वि देखी  जा रही है।

कैंसर में इन मामलों में नब्बे फीसदी तम्बाकु, मदिरा व सुपारी के सेवन से होतें है 
और इस प्रकार के कैंसर की रोकथाम की जा  सकती है।’ भारतीय चिकित्सा अनुसंधान (आईसीएमआर) की रिपोर्ट मे भी इस बात का खुलासा किया गया है कि पुरुषों में 50% और स्त्रियों में 25% कैंसर   की वजह तम्बाकू है इनमें से 60% मुंह के कैंसर हैं। धुआँ रहित तम्बाकू में 3000 से अधिक रासायनिक यौगिक हैं, इनमें से 29 रसायन कैंसर पैदा कर सकते हैं।

उन्होने कहा कि हैड नेक कैंसर के मामले राष्टीय स्वास्थ्य योजनाओं, वंचित लोगों,परिवारों व समुदायों पर भार बढा रहे हैं।भाग्यवश हैड नेक कैंसर से  जुडे  अधिकांश, मामलों में यदि  बीमारी का पता  पहले लग जाये तो इसे रोका जा सकता है और ईलाज भीकिया जासकता है। 

लेकिन लाखों लाखों लोग रोग की देरी से पहचान, अपर्याप्त ईलाज व अनुपयुक्त पुनवर्वास सुविधाओं के शिकार हो जाते है।’जिस कारण कितनी ही मातांए व पत्नी व बहिने परिवारजनो से वंचित हो जाती है। टाटा मेमोरियल  हॉस्पिटल चतुर्वेदी  जो इस  अभियान की अगुवाई वैश्विक स्तर पर  कर रहे है, कहते है ’हैड नेक कैंसर के नियंत्रणके लिये सरकारो, एनजीओ, चिकित्सा व स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनोशिक्षा  व उघोग संस्थानों सहित  बहु  क्षेत्रिय  सहयोग की आवश्यकता है।

हैड नेक कैंसर पर प्रभावी नियंत्रण और ईलाज की और वैश्विक ध्यान आकर्षित करनेके लिये अंतर्राष्टीय फेडरेशन ऑफ हेड एण्ड नेक ऑनोलोजिक  सोसाईटिज - आईएफएचएनओएस- ने जुलाई 27 को विश्व सिर, गला कैंसरदिवस - डब्ल्यु एचएनसीडी-  के रूप  में मनाये जाने का प्रस्ताव रखा और आज यह मनाया जाने लगा है। फेडरेशन को इसके लिये अनेक सरकारी संस्थानों, एनजीओ, 55 से अधिक सिर व गला कैंसर संस्थानों व 51 देशों का समर्थन प्राप्त है।

डा.पंकज चतुर्वेदी बतातें है कि एशियन पेसिफिक जर्नल ऑफ कैंसर प्रिवेंशन 2008 व 2016 में प्रकाशित शोध पत्र के अनुसार 2001में पुरुषों में मुँह का कैंसर के 42725 वंही 2016 में 65205,वंही  महिलाओं में 22080 व 35088, गले और श्वासं नली 49331, 75901, महिलाओं में 9251,14550,  भोजन नली 24936 व 38536  वंही  महिलाओं में 17511 व 28165,  अमाश्य में  20537 व 31538 वंही महिलाओं में 11162 व 17699,  फैंफड़े 39262 व 60730 वंही  महिलाओं में 9525 व 15191, स्तन  कैंसर महिलाअेां में 89914 व 140975,  गर्भाश्य महिलाओं में 79827 व 125821  तथा अन्य तरह के 214967  व 315840  तथा महिलाअेां में 166629 व 252410 रोगी पाए गए।

देश में अनेक परेशानियों के बावजूद, हालाँकि गुटखे पर, जो की एक धुंआ रहित  औधोगिक उत्पाद है, पर लगभग पूरे भारत  परप्रतिबंध लग गया है।गुटखे के अलावा, 13 राज्यों ने अब उत्पादित  सुगंधयुक्त  चबाने वाले तम्बाकु को भी  निषेध कर दिया है। 'तम्बाकु पीडितों  की आवाज’ नामक तम्बाकु पीडितों के  स्वयं के द्वारा चलाये गये निरंतर आंदोलन के  परिणाम स्वरूप यह  प्रतिबंध प्रभाव  में आया। इस आंदोलन से देश के नामी कैंसर विशेषज्ञ भी जुड गये।

उन्होने बताया कि वर्ष 2014 में जॉन हॉपकिंस यूनिर्वसिटी ब्लूूमबर्ज स्कूल ऑफ पब्लिक हैल्थ व विश्व स्वास्थ्य संगठन ने गुटखाप्रतिबंध के प्रभावों पर एक अध्यन करवाया।अध्ययन के दोरान देश के सात राज्यों:  असम, बिहार, गुजरात, कर्नाटक,  मध्यप्रदेश, महाराष्ट, उड़ीसा और  दिल्ली में 1,001 वर्तमान व पूर्व  गुटखा उपभोक्ताओं और 458 खुदरा तम्बाकु  उत्पाद विक्र्रताओं पर  सर्वे  किया गया।

इस सर्वे में सामने आया कि 90 फीसदी रिस्पोडेंन्ट्स ने इच्छा जताई कि सरकार को धुंआ रहित तम्बाकु के सभी प्रकार के उत्पादों कीबिक्री और डिस्टिब्यूशन पर प्रतिबंधलगा देना चाहिये। इस पर 92 फीसदी लोगों ने प्रतिबंध का समर्थन किया।99 फीसदी  लोगों  ने कहाकि  भारतीय युवाओं के स्वाथ्य के  लिये प्रतिबंध  अच्छा है।

जो लोग प्रतिबंध के बावजूद गैरकानूनी ढंग से पैकेज्ड तम्बाकु का सेवनकरते है उनमें से आधे लोगों ने कहा कि प्रतिबंध के बाद उनके गुटखा सेवन में कमी आई है। 80 फीसदी लोगो ने विश्वास  जताया कि प्रतिबंध  ने उन्हें  गुटखा  छोडने  के लिये प्रेरित किया है और इनमें  से   आधे लोगों ने कहा उन्होने वास्तव  में  छोडने की कोशिश भी की है।

प्रतिबंध के बाद जिन लोगों ने गुटखे का सेवन छोडा उनमें से प्रत्येक राज्य से एक बडे हिस्से -41 -88 फीसदी ने  कहा कि  प्रतिबंध के बाद  उन्होने गुटखे का सेवन छोड दिया।

इंडेक्स ऑफ इंडिस्टरियल प्रोडक्शन -आईआईपी- के आंकडो  के मुताबिक सिगरेट, बीडी व चबाने वाले तम्बाकु उत्पादों को उत्पाद मार्च 2015 में पिछले वर्ष की अपेक्षा  12.1 फीसदी गिर गया।

चबाने वाले  तम्बाकु  उत्पाद पर  प्रतिबंध  के प्रभाव  यूरोमोनिटर इंटरनेशनल की रिपोर्ट दर्शाती है जिसके मुताबिक धुआँ रहित  तम्बाकु उत्पाद में निम्न गिरावट देखी गई है - वर्ष 2011: 2 प्रतिशत 2012: 26 प्रतिशत  2013 या 80 प्रतिशत  पूर्वानुमान  के  मुताबिक  यह दर 2014 मे 40 फीसदी तक और 2015 में करीब 35 प्रतिशत तक गिर गई। 2016 तक 30 व 2018 में 25  फीसदी  तक गिर जायेगी। 

comments

Be the first to comment.

leave a comment


Already have an account?

Create Account



Log In Your Account



Forgot Password


You can request for your password by providing your email and reset password link will be sent at your email address.

Supplied Email doesn't exists. Please enter correct email.
We have successfully received your password reset request and password reset for link has been sent to you email. Please look at your Spam folder also as Google invariably sends these emails to your Spam folder.

Choose Locations

My City