भक्ति संगीत देश में हमेशा अमर रहेगा-जलोटा
Reporter: Rajendra Shekhawat
18 Oct, 2016
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चित्तौडग़ढ़: भारतीय भक्ति संगीत की धरोहर हमें विरासत में मिली है जो आज भी लोगों के मन में समाई हुई है, इसी कारण यह कहा जा सकता है कि हमारा भक्ति संगीत कभी देश से लुप्त नहीं होगा वरन् अमर रहेगा।

यह बात देश के प्रसिद्ध भजन सम्राट पद्म अनूप जलोटा ने मंगलवार को मीरा महोत्सव की भजन संध्या से पूर्व एक भेंट में कही। उन्होंने कहा कि 23 वर्ष बाद एक बार फिर भक्ति और शक्ति की इस पावन धरा पर अपने भजनों की प्रस्तुति देना उनके लिये न केवल सौभाग्य की बात होगी वरन् भक्त शिरोमणि मीरा के प्रसिद्ध भजनों को उन्हीं की कर्मस्थली पर प्रस्तुत कर अमर लोक भजन गायिका का आशीर्वाद भी ले सकेंगे।

उन्होंने कहा कि हमारेे देश का हर त्यौहार हमें भगवान की ओर आकर्षित करता है, इसी कारण भक्ति संगीत भी हमारी परम्परा बन चुकी है। जलोटा का मानना है कि वर्तमान फिल्मी दौर और पाश्चात्य संगीत की चकाचौंध के बीच भी भक्ति संगीत चरम सीमा पर है इसी कारण देश के कई धार्मिक चैनल प्रमुखता से भजनों की प्रस्तुतियां देे रहे है।

उनका मानना है कि संगीत का स्वरूप भले ही बदल जाता है लेकिन संगीत से जुड़़ कर उसकी बारिकियों को समझने के बाद ही उसे जीवंत रखा जा सकता है। भजनों की महत्ता बताते हुए जलोटा ने कहा कि आज भी देश के हर घर की शुरूआत भजनों से होती है और उन्हें इस बात की खुशी है कि तीन पीढियां उनके भजनों को सुनते हुए आज भी गुनगुना रही है।

भक्ति संगीत के लुप्त होने की सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रत्येक भारतीय ईश्वर के प्रति आस्था रखता है इसी कारण प्राय: हर शुभ कार्य की शुरूआत मंदिर में पूजा और भजन से की जाती है। उन्होंने बताया कि आज के दौर में भी सोनू निगम, अरिजित सिंह, हरी हरण, सुनिधी, श्रेया गोशाल जैसे गायक अपनी अलग ही पहचान बनायें हुए है, वहीं भारतीय शास्त्रीय संगीत भी दुनिया में अनूठा माना जाता है। इसी कारण बांसुरी वादन के लिये हरी प्रसाद चोरसियां, शहनाई वादक बिसमिल्ला खां, तबला वादक जाकिर हुसैन जैसे कई ख्यातनाम वाध्य वादकों को कई देशों में आमंत्रित किया जाता है।

जलोटा ने अपने प्रारम्भिक गजल गायिकी के दौर की स्मृतियों को ताजा करते हुए कहा कि लागा चुनरी में दाग जैसी गजले आज भी लोगों के जेहन में है, लेकिन गजल में उर्दू अलफाज का प्रयोग जरूरी होता है जबकि आज की युवा पीढी शुद्ध हिंदी से ही जब दूर है तो उर्दू मिश्रित गजल को समझ पाना कुछ कठिन सा हो गया है। जलोटा ने बताया कि वे स्वंय भजन गायिकी के लिये कई युवाओं को अपने गुरूकुल में शिक्षा दे रहे है जिसमें रायपुर, मुम्बई और लंदन के लोग भी भजन गायिकी को पूरी रूचि के साथ सीख रहे है।

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