बैंक कार्मिकों की मनमानी बनी जी का जंजाल
Reporter: Kumar Aaditya
30 Nov, 2016
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चित्तौडग़ढ़: नोटबन्दी के बाद बैंकों से लेन-देन के लिए कतारों का सिलसिला अब भी जारी है। खांसतौर पर जिले के पुराने व प्रमुख बैंकों में खाताधारकों की कतारें लगी हुई है। जहां एक और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कालेधन व भ्रष्टाचार की मुहिम के तहत नोटबन्दी की घोषणा की लेकिन बैंककर्मियों द्वारा इस घोषणा के बाद ग्राहकों से दुव्र्यवहार कर उनकी साख पर पलीता लगाया जा रहा है।

ऐसे ही कुछ मामले बीते दिनों देखने को मिले। हालात यह है कि जिले के प्रमुख भारतीय स्टेट बैंक के बाहर बैठने वाले गार्ड के भरोसे बैंक के ग्राहक है। बैंक के बाहर ही कतारे लगवाई जा रही है और चार-चार व्यक्तियों को अन्दर भेजा जाता है। बाकि लोग धूप में खड़े-खड़े अपनी बारी का इन्तजार कर है अब बाहर खड़े लोगों को रूपया जमा कराने के अलावा कोई दूसरा भी काम हो तो गार्ड उन्हें प्रवेश नहीं करने देता यहां तक की बैंक के ग्राहकों व ग्रामीणों के साथ दुव्र्यवहार तक किया जाता है। कुछ ग्राहकों ने कवर स्टोरी को बताया कि पासबुक में एन्ट्री या मैनेजर से मिलने के लिये भी गार्ड द्वारा साफतौर पर मना कर दिया जाता है। कल कुछ ग्राहकों ने इसकी शिकायत लीड बैंक मैनेजर को भी की है।

एक वाक्या दिखाते है: 

दिन-मंगलवार, समय करीब पोंने चार बजे, स्थान स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया बैंक के बाहर का नज़ारा, गार्ड ने साढ़े तीन बजे बैंक का गेट लगा दिया । बैंक के अंदर से लोगों को एक-एक कर बाहर निकाला जा रहा था बैंक के बाहर दो कारें आकर रूकती है । बैंक मे लगे सिक्योर्टी गार्ड का फोन बजता है । और बैंक का गेट खुल जाता है । दोनों कारों से उतरे चार व्यापारी अपने बैंक संबंधी दस्तावेज जैसे चैकबुक और बैंक खाते की पासबुक लेकर अन्दर दाखिल हो जाते है । गेट के बाहर खड़े दूसरे लोगो विरोध करते है बैंक के गेट पर लगा सिक्योर्टी गार्ड लोगों के विरोध को दरकिनार कर देता है । और लोग अपना मुंह लटकाए बाहर ही खड़े रहते है ।

इसी दौरान एक व्यक्ति सिक्योर्टी गार्ड की किसी से फोन पर बात करता है । सिक्योर्टी गार्ड उसे भी बैंक मे प्रवेश दे देता है । लेकिन सिक्योर्टी गार्ड की हेकड़ी देखिए लगता है सिक्योर्टी कार्ड न हो कर वो बैंक का जरनल मैनेजर हो गया है । इसी बीच बैंक से मैनेजर साहब निकलते है । मैनेजर साहब को कुछ देर पहले बैंक के बाहर जो वाक्या गुजरा उससे अवगत कराया गया तो बैंक मैनेजर का जबाव भी सुनलीजिए - मेरे बैंक का सिक्योर्टी गार्ड जो कर रहा वह सही है । मै क्या करूं बैंक की लाइन ही खत्म नही हो रही है । ज्यादा परेशानी है तो मोदी से शिकायत कर दीजिए हम तो परेशान हो गए । रोज-रोज नये नियम आ रहे है हम क्या करें ।

ज्यादा रूपयों पर जल्दी नम्बर :

जिले के मुख्य एसबीबीजे व एसबीआई बैंकों में छोटी राशि व मोटी राशि जमा करने के लिए अलग-अलग काऊंटर बनाये गये है। कम राशि जमा कराने वालों को घण्टों इन्तजार करना पड़ रहा है जबकि 35 हजार से अधिक रूपया जमा कराने वाले की कतार छोटी होने के कारण जल्दी नम्बर आ जाता है। छोटी राशि जमा कराने के लिए आस-पास के ग्रामीण, बुजुर्ग, दिव्यांग, महिलाएं आदि कतारों में इन्तजार करते है लेकिन घण्टों खड़े रहने के बाद ही नम्बर आ पा रहा है।

कहीं जहर न बन जाए कड़वी दवा :

नोटबंदी का आज 22 वां दिन है । लेकिन लोगों को राहत मिलने की जगह परेशानियां बढ़ती जा रही है । बैंकों मे पर्याप्त रूपया होने की बात सामने आने के बाद भी बैंकों सरकार द्वारा तय की राशि भी नही मिल पा रही है । जिसके चलते मोदी सरकार के फैंसले का स्वागत करा रहा आम नागरिक भी धीरे-धीरे नोटबंदी के इस फैंसले पर अब फिर से विचार करने लग गया है । प्रधानमंत्री ने कहा था कि मर्ज को खत्म करने के लिए कभी-कभी कड़बी दबा भी देनी पड़ती है । लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि कहीं तथाकथित बैंक कर्मी मोदी की इस कड़वी दबा को ज़हर ना बना दे । शहर की कई बैंकों मे साढ़े तीन बजे के बैंक के गेट बंद कर दिए जाते है । बैंकों की पूरी व्यवस्था सिक्योर्टी गार्डों के हवाले कर दी जाती है । जिसके चलते आम आदमी तो धक्के मिलना भी स्वभाविक है । लेकिन बात उन लोगों की करें जो कभी बैंक की लाइन मे नही दिखे उनके लिए बैंक के दरबाजे हमेशा ही खुले रहते है । 

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